कितनी अजीब सी बात है
जिन सपनो के पीछे हम भागते है
वो पूरा होने के बाद
एक बड़ी भीड़ हमारे साथ होती है
मगर वो नहीं होते
जिनके लिए हमने वो सपने पूरे किये
इसलिए समझ नहीं पाता हूँ
कि सपनो को छोड़ दूँ या अपनों को...असीम..
जिन सपनो के पीछे हम भागते है
वो पूरा होने के बाद
एक बड़ी भीड़ हमारे साथ होती है
मगर वो नहीं होते
जिनके लिए हमने वो सपने पूरे किये
इसलिए समझ नहीं पाता हूँ
कि सपनो को छोड़ दूँ या अपनों को...असीम..
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