याद है तुम्हें वो वक्त जब मेरी आवाज़ सुनने की हर दिन तुम्हें बेचैनी रहती थी, और आज कई हफ्ते गुज़र जाते हैं अपनी गुफ्तगू हुए, तुम नहीं बदले मुझे इस बात का यकीन है, वक़्त बदल गया जिस पर हमारा बस नहीं है....असीम...
Thursday, 24 November 2016
मैंने बयां किये जब अपने हालात उनसे, वो सुनकर बोले वाह क्या शायरी है...असीम...
मै अब तुझे बिलकुल नहीं सताऊंगा, तेरी दुनिया से बहुत दूर चला जाऊंगा, कभी भूल से जो याद आएगी तुझे मेरी, तेरी रातो में ख्वाब बनके चला आऊंगा.... असीम....
दूरियां रखना ही बेहतर है उसे देखने के बाद, वो ज्यादा खुश रहता है मुझसे बिछड़ने के बाद...असीम...