Sunday, 27 November 2016

वक़्त

याद है तुम्हें वो वक्त जब मेरी आवाज़ सुनने की हर दिन तुम्हें बेचैनी रहती थी,
 और आज कई हफ्ते गुज़र जाते हैं अपनी गुफ्तगू हुए, 
तुम नहीं बदले मुझे इस बात का यकीन है,
वक़्त बदल गया जिस पर हमारा बस नहीं है....असीम...

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