Sunday, 30 October 2016

असीम प्यार

घर की दहलीज पे अपनी,
जलते दीये को देखकर ऐसा लगा
जैसे ज़िन्दगी में
एक नई रोशनी आयी हो...
पास जाकर
दीये की लौ को देखा
तो उसमें
तुम्हारा अक्स नज़र आया...
जानता हूँ
वो कोई और नहीं
तुम ही हो
जो दुनिया के डर से
घर के भीतर न आ सकी
और मेरी दहलीज पे
ये दीया रौशन कर गयी...
जानता हूँ
कि तुम कहीं दूर से
इस दीये को
रोज़ देखती हो,
इसलिये कई सालों से
हर रात मैं
इस दीये में तेल डाल कर
इसे रौशन करता हूँ...
मगर आज
कई सालों बाद
महसूस हो रहा है
कि अब ज़िन्दगी
अंतिम पड़ाव पर जा रही है...
मैंने आज
दीया नहीं जलाया,
ये सोचकर
कि तुम अँधेरा देखकर
मेरी दहलीज तक आओगी
इसलिये मैंने उस दीये के पास
एक सुन्दर लिबास
और एक कागज़ के टुकड़े पर
अपना संदेश लिखा है
और घर के अन्दर
तुम्हारे आने की
राह तक रहा हूँ...
मुझे अहसास हुआ
तुम्हारे आने का,
कागज़ के टुकड़े को
उठाने का,
और धीरे-धीरे
घर के भीतर आने का...
तुम एक-एक कदम बढ़ रही हो
और मैं हर कदम पर
अपनी जाती हुयी साँसों को
रोकने की
कोशिश कर रहा हूँ...
तुम दरवाजे के पास हो
और शायद
ये मेरी आखरी साँस है...
दरवाज़ा खुलने की आहट हुयी
और कम्बख़्त मेरी साँसों ने
मेरा साथ छोड़ दिया,
तुम्हें सजे-धजे देखने की तमन्ना
तमन्ना ही रह गयी
और एक सवाल
जो हमेशा पूछना चाहा था,
वो मन में ही रह गया...
आखिर क्यों करती हो
मुझसे इतना प्यार,
"असीम" प्यार,
क्यों...

Tuesday, 11 October 2016

लोग सोते हैं कुछ अच्छे ख्वाब देखने को,
और मैं रातो को जागकर ख्वाबो का शहर ढूंढता हूँ... अमित असीम..

Thursday, 6 October 2016

जिन्दा मौत

मौत से बचने का सबसे शानदार
तरीका है,
दूसरो के दिलों में
जिन्दा रहना सीख लो.....!
ये कफन, ये जनाज़े, ये शमशान
सिर्फ बातें हैं मेरे दोस्त,
वरना मर तो इंसान
तभी जाता है, जब याद करने
वाला कोई ना हो.......असीम....

Monday, 3 October 2016

हम दोनों पर एक दूसरे की यादों का सामान तो बहुत है,
बस फ़र्क ये है कि तेरा बासी हो गया और मेरा अब भी ताज़ा है... असीम..
सनम की सूरत में मैंने, खुदा को पाया है, 
प्यार करू उसे या सज़दे में झुक जाऊ....असीम...
कुरान की आयत है या गीता का कोई पाठ है
एक अजीब सा सकूँ मिलता है तेरा नाम लेने से.... असीम...
मेरे हर दर्द की बस एक दवा है तू,
मरते में जान फूंक दे वो दुआ है तू, 
औरो की बात तो नहीं जानता पर, 
मेरे लियें तो मेरा खुदा है तू.....असीम..
एक दूसरे को अपनी जान कहने वाले, 
आज दोनों बेजान से जिया करते हैं..... असीम....
इन लम्हो की क्या बात करूँ जो कटते हैं अरसे जैसे,
वो अरसे ना जाने कहाँ गए जो कटते थे लम्हो जैसे....असीम

Sunday, 2 October 2016

ख्वाहिशे

अपनी ख्वाहिशो को पाने की दौड़ में,
तुमने ये तक ना देखा कि
तुम्हारे कदमो की नीचे
मेरी ख्वाहिशे कुचल गई..... असीम....

तेज बारिश

तेज बरसती बारिश में,
पूरी तरह भीग चुका हूँ
पूरे बदन को अहसास है
इस गीलेपन का फिर भी
पता नहीं क्यों ये अहसास
मन तक नहीं पंहुचा...
क्यों... ये तुमसे बेहतर कोई नहीं जानता... असीम...
बरसात की बूंदो में आंसू तो छुपा लेता हूँ अपने,
आँखों की लाली छुपाने का कोई तरीका तो बता....असीम...
तुम खुश होकर भी आँखों में नमी रखते हो,
मै गम में रहकर भी चेहरे पे हंसी रखता हूँ, 
तुम्हारे बारे में किसकी क्या राय है नहीं मालूम,
पर लोग कहते हैं, मै पहले से बेहतर दिखता हूँ.... असीम...

पागल पगली

कभी खुद में खुद से बाते करना, 
अकेलेपन मे यादो में खोये रहना, 
कभी खुश होना कभी खुद में सहम जाना,
मेरी ये हरकते देख, 
लोग मुझे पागल कहते हैं, 
गर तुझे पगली कहे,
तो ताज्जुब कोई बात नहीं होगी...असीम..

हसीन पल

इस लंबी सुनसान ज़िन्दगी से बेहतर,
मैं चाहता हूँ मौत के वो दो हसीन पल
जो तेरी बहो में गुज़रे.... असीम...

सफर

हम दोनों आज भी वैसे ही है,
बस सफर बदल गया है,
तुम ज़िन्दगी की दौड़ में शामिल हो गये
और मैं यादों के सफर में चल रहा हूँ....असीम....
दिल मुझे मेरा अब पत्थर सा लगने लगा है,
सोचता हूँ तराश के इसे तेरी मूरत बना लूँ.... असीम...
हिचकियों के लिये कोई पुख्ता ईलाज ढूंढ ले तू ही,
तुझे याद करने का, मेरा रोग तो लाइलाज है.... असीम....
होठो पे सिगरेट और सीने में दिल सुलगता है रात भर,
सोचता हूँ किसी दिन इस धुँए के साथ ग़म भी उड़ जाएंगे....असीम..

Saturday, 1 October 2016

सोये लफ्ज़

हर रात की तरह, मै जागा था कल रात भी
मगर लफ्ज़ सोये थे,इसीलिये कुछ लिख न सका...असीम...