Wednesday, 28 September 2016

नींद की साज़िश

सुनो! सुनो ना
क्या सुन पा रहे हो मुझे
हम्म्म्म्म
बहुत रात हो चुकी है
लगता तुम भी सो गए हो
शायद औरो की तरह
तुम जान चुके हो
के रातो को जागना
मेरी आदत बन चुकी है
मै जानता हूँ
ये आदत बुरी है
लेकिन तुम तो कहते थे
कि मेरी हर आदत में शामिल रहोगे
चाहें वो बुरी ही क्यों ना हो
फिर आज अचानक कैसे
नींद आ गई तुम्हे
लगता है
औरो की तरह
ये नींद भी
मुझे तुमसे अलग करने की
साज़िश कर रही है.....असीम....⁠⁠⁠⁠

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