Wednesday, 28 September 2016

खूबसूरत मौत

तुम्हारी हंसी मेरे कानो में पड़ रही थी
सहला रही थी तुम
अपनी नर्म उंगलियों से मेरा सर
एक टक तुम्हारा मुझे देखना
सच में
मुझे पागल किये दे रहा था
और उस पर तुम्हारा
मुझे कस कर बाँहों में इस तरह भर लेना
कि हवा भी ना गुज़र सके हमारे बीच से
मेरे होठो पर तुम्हारे होंठ
और नाक इस तरह सटी हुई थी
कि जो साँसे मैं ले रहा था
वो तुम्हारे अंदर से ही
निकल रही थी
अदभुत सा था वो लम्हा
जिसमें कैद हो जाना चाह्ता था मै
हमेशा के लिये
एक ही सोच चल रही थी मन में
काश के कभी सुबह ना हो
और मैं इसी ख्वाब में जी लू
अपनी बाकि ज़िन्दगी
या फिर तुम्हारी बाँहो में ही
दम तोड़ दूँ और पा जाऊ
एक खूबसूरत मौत....असीम.....

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