Friday, 30 September 2016

तन्हा रात

फिर वही रात वही तन्हाई,
 वो ही उदासी
सुलगती सिगरेट,
हाथ में कलम और कुछ कोरे पन्ने
इन सबके बीच
दिल बहलाने को
वही तेरी यादे,
बस
और कुछ नहीं
कुछ भी नहीं.....असीम....

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