Friday, 30 September 2016

अद्भुत प्रेम

कई अर्से से ना उससे कोई बात हुई ना मुलाक़ात,
कल रात अचानक उसकी ख़बर आई,
कहने लगी हम साथ जी नहीं सकते,
क्या मेरे साथ मरना चाहोगे,
मुझे कुछ समझ ना आया
 बस इतना ही पूछा मैंने...
तुम मेरे पास आओगे या मुझे आना है....असीम....

मैं+ तुम = हम

हम में से मैं निकल जाऊ
तो सिर्फ तुम बाकि रह जाते हो
और तुम निकल जाओ
तो मै बाकि रह जाता हूं
और सच कहूँ
 तो मुझे मै रहना
बिल्कुल अच्छा नहीं लगता
बाकी तुम पर छोड़ता हूँ..... असीम....

ज़िम्मेदार तुम

मेरा गुस्सा पागलपन
इसकी ज़िम्मेदार मेरी तन्हाई नहीं
तुम हो
काश तुम उस वक़्त
मुझे अपने पास रोक लेते
या चले आते मेरे साथ
सबको छोड़कर..... असीम....

तन्हा रात

फिर वही रात वही तन्हाई,
 वो ही उदासी
सुलगती सिगरेट,
हाथ में कलम और कुछ कोरे पन्ने
इन सबके बीच
दिल बहलाने को
वही तेरी यादे,
बस
और कुछ नहीं
कुछ भी नहीं.....असीम....

Thursday, 29 September 2016

अच्छी कलाकार

लोग कहते है
कि कलाकार गम में रहकर भी
चेहरे पे ख़ुशी रखता है
पर तुम्हारी आंखों में,
 मुझसे दूर होने का गम
साफ़ नज़र आता है
मैंने तो सुना था
 तुम भी
एक अच्छी कलाकार हो....असीम...

बेमेल स्वेटर

थोड़ी सी लाल ऊन लेकर
मैंने सोचा एक स्वेटर बुन लूँ ,
एक मन में आया क्यों न बाजार से खरीद लूँ,
जैसे सब खरीदते हैं...
फिर कुछ पल सोचने के बाद
मैंने मन बना लिया
कि ख़ुद ही बुनूँगा इसको मैं,
और 2 सलाईयाँ लेकर शुरू किया बुनना...
ऊन का कुछ अंदाज़ा नहीं था,
ऊन ख़त्म हो गयी और स्वेटर अभी
आधा भी नहीं था,
सोचा अगली ऊन खरीदने से पहले
क्यों न अपनों से उनकी पसंद का रंग पूछ लूँ
और उसको भी इस स्वेटर में शामिल कर लूँ,
और फिर सिलसिला शुरू हुआ सबकी पसंद के रंगों का...
मैं सबके मन को रखता हुआ
हर किसी की पसंद के रंग की ऊन लेकर
जोड़ता गया अपने स्वेटर में,
और समय आ ही गया जब मेरा स्वेटर बनकर तैयार था...
सोचा, क्यों ना इस रंग बिरंगे
सबकी पसंद के रंगो वाले स्वेटर को पहनू
और जानूँ के कैसा है ये,
यही सोच लेकर निकल पड़ा उन्हीं अपनों के पास...
जिसने भी मेरा स्वेटर देखा वो खुश तो हुआ
मगर मज़ाक बनाने के अंदाज़ में,
और बस एक ही बात बोली-
"ये बेमेल रंगो का मेल तुम्हें कैसे सूझा?"
मैंने सीधे जवाब में कह दिया-
"इसमें मेरे सब अपनों की पसंद का एक-एक रंग लगा है..."
तो जवाब आया-
"भला कोई ज़िन्दगी में सबको खुश रख पाया है क्या?"
सत्य सुनकर अजीब सा लगा, मगर
शायद वो बात कटु सत्य थी...
मैंने उस स्वेटर को ना फेंका,
ना फाड़ा, ना जलाया
बल्कि एक सबक मान कर रख दिया
एक हेंगर में टांग कर अपने कमरे में...
आज जब भी मुझसे कोई रूठता है
तो मैं उस स्वेटर को देखता हूँ
और याद कर लेता हूँ कि जब एक स्वेटर में
सबकी पसंद के रंग डालने के बाद वो बेमेल हो गया,
तो भला ज़िन्दगी में सबको खुश रखना
उस बेमेल स्वेटर को पहनकर
अपना ही मज़ाक बनवाने से ज़्यादा
कुछ नहीं है,
कुछ भी नहीं है…

-अमित असीम

Wednesday, 28 September 2016

खूबसूरत मौत

तुम्हारी हंसी मेरे कानो में पड़ रही थी
सहला रही थी तुम
अपनी नर्म उंगलियों से मेरा सर
एक टक तुम्हारा मुझे देखना
सच में
मुझे पागल किये दे रहा था
और उस पर तुम्हारा
मुझे कस कर बाँहों में इस तरह भर लेना
कि हवा भी ना गुज़र सके हमारे बीच से
मेरे होठो पर तुम्हारे होंठ
और नाक इस तरह सटी हुई थी
कि जो साँसे मैं ले रहा था
वो तुम्हारे अंदर से ही
निकल रही थी
अदभुत सा था वो लम्हा
जिसमें कैद हो जाना चाह्ता था मै
हमेशा के लिये
एक ही सोच चल रही थी मन में
काश के कभी सुबह ना हो
और मैं इसी ख्वाब में जी लू
अपनी बाकि ज़िन्दगी
या फिर तुम्हारी बाँहो में ही
दम तोड़ दूँ और पा जाऊ
एक खूबसूरत मौत....असीम.....

सपने और अपने

कितनी अजीब सी बात है
जिन सपनो के पीछे हम भागते है
वो पूरा होने के बाद
एक बड़ी भीड़ हमारे साथ होती है
मगर वो नहीं होते
जिनके लिए हमने वो सपने पूरे किये
इसलिए समझ नहीं पाता हूँ
कि सपनो को छोड़ दूँ या अपनों को...असीम..

नींद की साज़िश

सुनो! सुनो ना
क्या सुन पा रहे हो मुझे
हम्म्म्म्म
बहुत रात हो चुकी है
लगता तुम भी सो गए हो
शायद औरो की तरह
तुम जान चुके हो
के रातो को जागना
मेरी आदत बन चुकी है
मै जानता हूँ
ये आदत बुरी है
लेकिन तुम तो कहते थे
कि मेरी हर आदत में शामिल रहोगे
चाहें वो बुरी ही क्यों ना हो
फिर आज अचानक कैसे
नींद आ गई तुम्हे
लगता है
औरो की तरह
ये नींद भी
मुझे तुमसे अलग करने की
साज़िश कर रही है.....असीम....⁠⁠⁠⁠

चाँद से वादा

मै रोज़ की तरह
इंतज़ार कर रहा था
चाँद के आने का,आज चाँद बड़ा हताश दिखा
मैंने जब इसका कारण पूछा तो
चाँद ने मुझसे बस इतना ही कहा
कि मैंने तुमसे जो कल वादा किया था
वो पूरा नहीं कर पाया
नहीं ला पाया उसका मुस्कुराता चेहरा
तुम्हारे लिए, ये मत सोचना के मैंने कोशिश नहीं की
काश मुझे मालूम होता
कि बदले में वो तुम्हारा मुस्कुराता चेहरा मांग बैठेगी
तो कभी तुमसे ये वादा ना करता
सच में बड़े ज़िद्दी हो तुम दोनों
एक दूसरे को मुस्कुराता तो देखना चाहते हो
मगर पहल कोई नहीं करना चाहता
अब मैं इसे प्यार कहूँ या.........
मुझे भी नहीं पता क्योंकि
21वी सदी में तुम दोनों के अलावा
मै किसी के प्यार का माध्यम नहीं हूं
और एक वादा तुम दोनों से लेना है
की जब भी तुम एक हो जाओगे
तो मुझे मत भूल जाना
आज अकेले अकेले मुझको देखा करते हो
कल साथ रहकर भी देखने आना
मेरी चाँदनी में तुम्हारा प्यार
और खिल उठेगा...
ये सुनकर
मैने बिना तुमसे पूछे
दोनों की तरफ से चाँद से वादा कर दिया है
मैंने कुछ गलत तो नहीं किया ना
अगर गलत लगे तो चुपके से बतला देना
मैं चाँद को मना लूंगा तुम्हारे लिए
सिर्फ तुम्हारे लिये......... असीम....

सफ़र

एक सफ़र ऐसा हो ,
जिसकी कोई मंज़िल ना हो
कोसों लंबा सफ़र
कभी ना खत्म होने वाला
मीलो मील चलने वाला
दिन को रात और
रात को दिन में बदलते देखने वाला
जवानी को बुढ़ापे में
बदलते देखता सफ़र
अच्छे बुरे  वक़्त को
महसूस करने वाला
ख़ुशी और ग़मो से कटता सफ़र
मैं ज़िंदगी भर इस सफ़र में
चलने को तैयार हूँ
लेकिन फिर भी थमा हूँ
शायद अकेला जाने से डरता हूँ
गर तुम हाथ थाम लो
तो कल ही निकल पडू मै
इस कभी ना खत्म होने वाले सफ़र पर.... .....असीम